सेक्टर के बारे में
पश्चिमोत्तर सेक्टर का परिचय
सीआरपीएफ का पश्चिमोत्तर सेक्टर देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे के मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित है और आतंकवाद से लड़ने] कानून और व्यवस्था बनाए रखने और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। जम्मू-कश्मीर] पंजाब और चंडीगढ़ में रणनीतिक रूप से तैनात यूनिटों के प्रशासनिक प्रमुख के रूप में] सेक्टर इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्राथमिकता में सेक्टर का ध्यान इन पर केंद्रित है।:
- जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान: पश्चिमोत्तर सेक्टर के प्रशासनिक नियंत्रण में बड़ी संख्या में वाहिनियां जम्मू और कश्मीर में तैनात हैं] जहाँ वे लगातार आतंकवाद विरोधी अभियानों में लगी हुई हैं। भारत के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक में तैनात ये वाहिनियां खतरों को निष्प्रभावी करने, शांति बहाल करने और विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए अथक प्रयास करती हैं।
- पंजाब में कानून और व्यवस्था: पंजाब की ऐतिहासिक] सामाजिक-राजनीतिक एवं संवेदनशील पश्चिम सीमा की चुनौतियों को पहचानते हुए] स्थिरता सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए वाहिनियां तैनात हैं। ये प्रयास राज्य में सद्भाव बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं जिसने अस्थिरता का एक लंबा और भयावह दौर देखा है।
- चंडीगढ़ में राज्य प्रशासन को सहायता: चंडीगढ़ में तैनात एक वाहिनी के साथ] यह सेक्टर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन की सहायता करने और प्रभावी और कुशल प्रशासन में योगदान देने के लिए अपनी विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान करता है। अपने परिचालन कर्तव्यों के इतर] पश्चिमोत्तर सेक्टर निम्न के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है:
- सुशासन: अपनी यूनिटों के बीच सुचारू समन्वय सुनिश्चित कर, समय पर प्रशिक्षण प्रदान करके अनुशासन बनाए रखते हुए, सेक्टर प्रशासनिक उत्कृष्टता के उच्च मानक स्थापित करता है।
- कर्मियों और परिवारों का कल्याण: यह मानते हुए कि बल की ताकत उसके कर्मियों की भलाई में निहित है, सेक्टर अपने सदस्यों और उनके परिवारों के कल्याण को प्राथमिकता देता है। यह मजबूत सहायता व्यवस्था प्रदान करता है, अपनेपन की भावना को बढ़ावा देता है, और एक ऐसा वातावरण बनाता है जो कर्मियों को बिना विचलित हुए अपने कर्तव्यों पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाता है।
- प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ: एक प्रशासनिक प्रमुख के रूप में, सेक्टर दक्षता और समर्पण की संस्कृति को बढ़ावा देते हुए अपनी इकाइयों को निर्बाध लॉजिस्टिक सहायता] परिचालन तत्परता और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करता है। सीआरपीएफ के साहस] नई एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में तुरंत ढल जाने की क्षमता और राष्ट्र की सेवा के स्वभाव को पश्चिमोत्तर सेक्टर ने मूर्त रूप दिया है। आतंकवाद से लड़ने] अस्थिर क्षेत्रों में शांति बनाए रखने और अपने कर्मियों के कल्याण के प्रति इसकी अटूट प्रतिबद्धता देश की आंतरिक सुरक्षा और शासन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।
स्थान:-
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का पश्चिमोत्तर सेक्टर कार्यालय रणनीतिक रूप से चंडीगढ़ के एक प्रमुख क्षेत्र हल्लोमाजरा में स्थित है] जिसे शहर से सीधे तौर पर जुड़े होने का लाभ है और यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।
शहर की प्रमुख सड़कों में से एक] दक्षिण मार्ग पर] यह कार्यालय एक सुनियोजित शहरी केंद्र में स्थित है। दक्षिण मार्ग न केवल चंडीगढ़ के प्रसिद्ध ग्रिड लेआउट में सुचारू रूप से जुड़ता है] बल्कि अंबाला-चंडीगढ़ रोड (एनएच-152) से भी निर्बाध रूप से जुड़ा हुआ है] जो शहर को क्षेत्र के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण राजमार्ग है।
चंडीगढ़: शहर के बारे में
चंडीगढ़] जिसे **द सिटी ब्यूटीफुल** के नाम से जाना जाता है] पश्चिमोत्तर भारत में हिमालय की शिवालिक रेंज की तलहटी में स्थित है। पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की राजधानी के रूप में कार्य करते हुए] इसे केंद्र शासित प्रदेश होने का गौरव भी प्राप्त है] जो इसे एक अद्वितीय प्रशासनिक इकाई बनाता है।
आधुनिक शहरी जीवन के अपने दृष्टिकोण को मूर्त रूप देते हुए] प्रसिद्ध फ्रांसीसी वास्तुकार ले कोर्बुजिए द्वारा शहर की योजना बहुत सूक्ष्मता से बनाई गई थी। चंडीगढ़ शहर नवीन शहरी नियोजन] वास्तुशिल्प प्रतिभा] और सौंदर्यशास्त्र के साथ कार्यक्षमता के मिश्रण का एक नमूना है। इसका नाम प्राचीन चंडी मंदिर से लिया गया है] जो देवी चंडी को समर्पित एक मंदिर है, जो उस स्थान के पास स्थित है जहां से शहर का विकास प्रारंभ हुआ था।
चंडीगढ़ अपने स्वच्छ] हरित वातावरण] आधुनिक इमारतों और कैपिटल कॉम्प्लेक्स] रॉक गार्डन और सुखना झील जैसे प्रतिष्ठित स्थलों के लिए जाना जाता है। इसे अक्सर भारत में शहरी नियोजन और आधुनिक वास्तुकला के सबसे सफल प्रयोगों में से एक माना जाता है।
चंडीगढ़ की जलवायु
- चंडीगढ़ में उपोष्णकटिबंधीय जलवायु का अनुभव होता है] जिसकी विशेषता अलग-अलग मौसम हैं:
- ग्रीष्मकाल (मार्च से जून): ग्रीष्मकाल गर्म होता है, जिसमें तापमान अक्सर 35°से 44° तक होता है] साथ ही शुष्क स्थिति भी होती है।
- मानसून (जुलाई से सितंबर): इस अवधि के दौरान शहर में मध्यम से भारी वर्षा होती है] साथ ही सघन हरियाली इसके परिदृश्य को सुशोभित करती है।
- शरद ऋतु (अक्टूबर से नवंबर): खुशनुमा और साफ आसमान के साथ एक सुखद बदलता मौसम रहता है।
- सर्दी (दिसंबर से फरवरी)% सर्दियां ठंडी होती हैं] तापमान 3° से 5° तक गिर जाता है] अक्सर सुबह कोहरा छाया रहता है।
- चंडीगढ़ की जलवायु] इसकी बढ़िया शहरी योजना और सुंदर परिवेश के साथ मिलकर] साल भर रहने और घूमने के लिए इसे एक जीवंत और आरामदायक जगह बनाती है।
पश्चिमोत्तर सेक्टर] सीआरपीएफ के उद्भव का इतिहास:-
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के पश्चिमोत्तर सेक्टर की सेवा और क्रमिक विकास का एक समृद्ध इतिहास हैः
- 23 जुलाई 1986 को] इस सेक्टर की स्थापना एक परिचालन इकाई के रूप में की गई थी] जोकि इस क्षेत्र में कानून और व्यवस्था बनाए रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका की शुरुआत थी।
- पंजाब में उग्रवाद और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के कारण 24 जुलाई 1990 को] सेक्टर के विस्तारित दायरे और जिम्मेदारियों को बढ़ाते हुए इसे पश्चिमोत्तर जोन के रूप में फिर से नामित किया गया था।
- 1 अक्टूबर] 2004 को प्रशासनिक और परिचालनिक दोनों कार्यों की देखरेख के लिए महानिरीक्षक के नेतृत्व में इसे फिर से पश्चिमोत्तर सेक्टर के रूप में बदल दिया गया] जिसका मुख्यालय हल्लोमाजरा] चंडीगढ़ को घोषित किया गया।
- विशेष महानिदेशक] जम्मू और कश्मीर क्षेत्र के तहत संचालित यह सेक्टर प्रशासनिक और परिचालन दोनों उत्तरदायित्व निभा रहा है] जो चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में प्रभावी फील्ड आपरेशन सुनिश्चित करता है।
विशुद्ध रूप से परिचालन इकाई के गठन से] एक व्यापक प्रशासनिक और परिचालन इकाई के रूप में सेक्टर की यह यात्रा इसके विकास पर प्रकाश डालती है, जोकि अपने स्तर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सीआरपीएफ के मिशन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
पश्चिमोत्तर सेक्टर] सीआरपीएफ की परिचालनिक जिम्मेदारियां
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का पश्चिमोत्तर सेक्टर अपने परिचालनिक क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शांति की रक्षा करने और कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालते हुए] यह सेक्टर भारत के कुछ सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों पंजाब] हरियाणा] हिमाचल प्रदेश एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में परिचालन जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करता है।
पश्चिमोत्तर सेक्टर का परिचालन क्षेत्राधिकार का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है:
- पंजाबः अपनी जीवंत संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध पंजाब राज्य, सीमा पार सुरक्षा और आंतरिक कानून और व्यवस्था के मुद्दों से संबंधित चुनौतियों का भी सामना करता है। पश्चिमोत्तर सेक्टर संभावित खतरों का मुकाबला करने और शांति बनाए रखने में स्थानीय अधिकारियों की सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- हिमाचल प्रदेशः इस पहाड़ी राज्य में पर्यटक और तीर्थयात्री बहुतायत में आते हैं। यह सेक्टर राज्य के सामरिक महत्व के क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संचालित होता है।
- केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा की साझा राजधानी के रूप में स्थित चंडीगढ़ में सुरक्षा के लिए सक्रिय योगदान की आवश्यकता है, और पश्चिमोत्तर सेक्टर इसकी मजबूत कवरेज सुनिश्चित करता है।
- हरियाणा (गुरुग्राम और फरीदाबाद जिलों को छोड़कर) पश्चिमोत्तर सेक्टर इस तेजी से विकासशील राज्य में परिचालन की देखरेख करता है, इसके शहरीकरण और औद्योगिक विकास के कारण उत्पन्न होने वाली कानून और व्यवस्था की चुनौतियों का समाधान करता है।
पश्चिमोत्तर सेक्टर] सीआरपीएफ की परिचालन और प्रशासनिक संरचना
अपनी व्यापक जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के पश्चिमोत्तर सेक्टर द्वारा अधीनस्थ कार्यालय सुव्यवस्थित तरीके से वर्गीकृत हैं। सेक्टर निम्नलिखित अधीनस्थ प्रतिष्ठानों की परिचालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की देखरेख करता है:
- 01 रेंज मुख्यालय: चंडीगढ़ रेंज मुख्यालय] अपनी जिम्मेदारी के क्षेत्र में परिचालन और प्रशासनिक कार्यों के लिए प्रत्यक्ष निरीक्षण और समन्वय प्रदान करता है।
- 02 ग्रुप केंद्र: ग्रुप केंद्र पिंजौर एवं जालंधर निर्बाध परिचालनिक तैयारियां सुनिश्चित करने के लिए सैन्य साजो-सामान की उपलब्धता] प्रशिक्षण और प्रशासनिक कार्यों के लिए ग्रुप केंद्र महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य करते हैं। संबद्ध यूनिटों के लिए ग्रुप केंद्र आपूर्तिकर्ता एवं ग्रुप केंद्र और यूनिटों में तैनात कर्मियों के लिए पारिवारिक स्टेशन के रूप में भी कार्य करता है।
- 10 प्रशासनिक यूनिटें: ये यूनिटें मुख्य रूप से अपने जिम्मेदारी के क्षेत्र में विभिन्न परिचालन कर्तव्यों तथा प्रशासनिक कर्तव्यों के लिए उत्तरदायी हैं] जो सेक्टर के शासनादेश को सुचारू रूप से लागू करने में सहायक होती हैं।
इस सेक्टर की परिचालनिक संरचना में शामिल हैं
1- फील्ड यूनिट:
- 13 बटालियन
- 51 बटालियन
- 245 बटालियन
2- अतिरिक्त परिचालन तत्व:
- 220 वीआईपी सुरक्षा बटालियन की कंपनियां
- 221 और 244 बटालियन वीआईपी सुरक्षा दस्ता
- टीओटी स्कूल] धरमपुर] हिमाचल प्रदेश
बटालियन स्तर की तैनाती से लेकर वीआईपी सुरक्षा] प्रशिक्षण एवं परिचालन में विशेष भूमिकाओं में सेक्टर का यह स्वरूप इसकी विविध परिचालनिक जिम्मेदारियों को दर्शाता है।
केंद्रीय खेल टीम प्रबंधनः
सेक्टर मुख्यालय निम्नलिखित 04 केंद्रीय खेल टीमों के प्रशिक्षण] खेल सामग्री सहायता और समग्र प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है] जिनमें से 02 टीमें इसके परिसर में और अन्य 02 ग्रुप सेंटर] जालंधर में तैनात हैं। विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों में सीआरपीएफ का प्रतिनिधित्व करने वाली इन टीमों को उनकी तैयारी और स्वास्थ्य के लिए अनवरत सहयोग मिलता है।
- सेंट्रल फुटबॉल टीम - ग्रुप सेंटर] सीआरपीएफ] जालंधर में स्थित है।
- सेंट्रल हॉकी टीम
- सेंट्रल बास्केटबॉल टीम - 51 बटा. सीआरपीएफ] हल्लोमाजरा] चंडीगढ़ में स्थित है।
- सेंट्रल वाटरस्पोर्ट्स टीम
दूरदर्शी नेतृत्व से सतत उत्कृष्टता तक:
पश्चिमोत्तर सेक्टर] सीआरपीएफ के पहले पुलिस महानिरीक्षक] भारतीय पुलिस सेवा के सुविख्यात पुलिस अधिकारी श्री के.पी.एस.गिल थे] जिनके नेतृत्व में सेक्टर की परिचालन उत्कृष्टता की नींव रखी गई। उन्होंने 23 जुलाई] 1986 को सेक्टर का कार्यभार संभाला।
वर्तमान में] श्री दिनेश उनियाल] पुलिस महानिरीक्षक] पश्चिमोत्तर सेक्टर] सीआरपीएफ के प्रशासनिक और परिचालनिक उद्देश्यों हेतु 07 फरवरी] 2024 से सेक्टर का नेतृत्व कर रहे हैं।
इस अवधि के दौरान 25 प्रतिष्ठित महानिरीक्षकों ने पश्चिमोत्तर सेक्टर] सीआरपीएफ की विरासत को आगे बढ़ाया है। पश्चिमोत्तर सेक्टर के अब तक के कमांडरों की सूची इस प्रकार हैः-
| क्र.सं. | अधिकारी का नाम | अवधि | |
|---|---|---|---|
| से | तक | ||
| 01. | श्री के.पी.एस.गिल भा.पु.से. | 23/07/1986 | 05/01/1988 |
| 02. | श्री जोगिंदर सिंह भा.पु.से. | 06/01/1988 | 24/07/1990 |
| 03. | श्री राजदीप सिंह भा.पु.से. | 27/01/2005 | 16/09/2005 |
| 04. | श्री एस.एस.संधू | 30/07/2005 | 31/07/2006 |
| 05. | श्री एस.सी.शर्मा | 01/09/2006 | 04/07/2007 |
| 06. | श्री टी.एस.ढिल्लों | 05/07/2007 | 18/08/2007 |
| 07. | श्री आर.के.सक्सेना | 03/09/2007 | 28/01/2010 |
| 08. | श्री सतसरूप सिंह | 29/01/2010 | 30/09/2010 |
| 09. | श्री बी.आर.कामथ | 01/01/2011 | 11/04/2011 |
| 10. | श्री जे.एस.गिल | 21/06/2011 | 31/01/2012 |
| 11. | श्री कुलबीर सिंह | 16/04/2012 | 31/03/2013 |
| 12. | श्री नलिन प्रभात, भा.पु.से. | 19/04/2013 | 08/06/2014 |
| 13. | श्री सूरजभान काजल | 09/06/2014 | 22/09/2015 |
| 14. | श्री एच.एस.सिद्धू, भा.पु.से. | 23/09/2015 | 02/01/2016 |
| 15. | श्री नलिन प्रभात, भा.पु.से. | 03/01/2016 | 04/07/2017 |
| 16. | श्री वी.एस.यादव, भा.पु.से. | 05/07/2017 | 25/09/2017 |
| 17. | श्री अजय भटनागर, भा.पु.से. | 25/09/2017 | 02/02/2018 |
| 18. | श्री सतपाल कपूर | 23/02/2018 | 30/09/2018 |
| 19. | श्री एस.उपाध्याय | 14/12/2018 | 20/02/2019 |
| 20. | श्री राकेश यादव | 20/09/2019 | 03/06/2019 |
| 21. | श्री के.विजय कुमार | 04/06/2019 | 14/04/2021 |
| 22. | श्री विक्रम सहगल | 14/04/2021 | 09/07/2021 |
| 23. | श्री मूलचंद पंवार | 10/07/2021 | 31/05/2023 |
| 24. | श्री जसबीर सिंह संधू | 01/06/2023 | 31/01/2024 |
| 25. | श्री दिनेश उनियाल | 07/02/2024 | अभी तक |
पश्चिमोत्तर सेक्टर] सीआरपीएफ की परिचालन एवं प्रशासनिक तैनाती
पश्चिमोत्तर सेक्टर सीआरपीएफ अपने परिचालन और प्रशासनिक नियंत्रण के तहत वाहिनियों के एक विस्तृत नेटवर्क की देखरेख करता है जो विभिन्न चुनौतियों से भरे क्षेत्रों में प्रभावी तैनाती सुनिश्चित करते हैं :-
परिचालन नियंत्रण
- सेक्टर की परिचालनिक कमान के तहत तीन बटालियन हैं 13 बटालियन 51 बटालियन और 245 बटालियन।
प्रशासनिक नियंत्रण
यह सेक्टर देश के विभिन्न राज्यों में रणनीतिक स्थानों पर तैनात यूनिटों का प्रबंधन करता है:
- जम्मू और कश्मीर में 07 यूनिट: राज्य में चल रहे सुरक्षा अभियानों में योगदान दे रही हैं।
- पंजाब में 02 यूनिट: शांति बनाए रखने और उभरती चुनौतियों का मुकाबला करने में राज्य के प्रयासों में सहयोग करना।
- चंडीगढ़ (केंद्र शासित प्रदेश) में 01 यूनिट: राजधानी शहर में सुरक्षा प्रदान करना और कानून व्यवस्था बनाए रखना।
यह व्यापक तैनाती प्रशासनिक दक्षता बनाए रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।