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श्री सुनील जून

श्री सुनील जून

अपर महानिदेशक/निदेशक

            सीआरपीएफ अकादमी के अपर महानिदेशक/निदेशक के रूप में कार्यभार संभालना एक सम्मान की बात है, एक प्रमुख संस्थान जिसे मूल रूप से अन्य प्रशिक्षक विकास कार्यक्रमों के संचालन के अलावा सीआरपीएफ के सीधे नियुक्त राजपत्रित अधिकारियों के बुनियादी प्रशिक्षण का संचालन करने का दायित्त्व है। अपने तेजी से विस्तार के कारण बल के राजपत्रित अधिकारियों के बुनियादी प्रशिक्षण की बढ़ती आवश्यकताओं के साथ तालमेल रखते हुए अकादमी ने अब तक 1918 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। आज तक, अपने पूर्व प्रशिक्षुओं को दिए गए 178 वीरता पदक - 02 कीर्ति चक्र, 10 शौर्य चक्र, 03 वीरता के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक और 163 वीरता के लिए पुलिस पदक इसके प्रशिक्षण के मानक को दर्शाते हैं।

            सीआरपीएफ सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल और नोडल आंतरिक सुरक्षा बल है जिसकी विविध भूमिकाएं/कर्तव्य हैं, यह अकादमी का कर्तव्य है कि वह अत्याधुनिक स्तर के इन युवा अधिकारियों को पर्याप्त कौशल और संयम के साथ विविध आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रशिक्षित करे। बल विभिन्न आंतरिक सुरक्षा कर्तव्यों से निपटने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, इन अधिकारियों को पास आउट होने पर तुरंत परिचालन कर्तव्यों के लिए तैनात किया जाता है। इसलिए, क्षेत्र की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए बुनियादी प्रशिक्षण को व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ जोड़ा जाना आवश्यक है। इसे प्राप्त करने के लिए, हमारे प्रशिक्षण प्रयास को कौशल निर्माण, मुख्य दक्षताओं और प्रदर्शन प्रबंधन के बीच दृश्यमान पुल बनाने का प्रयास करना चाहिए। हमें अपनी सतत सीखने की रणनीति को मजबूत करना चाहिए जिसका तात्पर्य है कि सीआरपीएफ अकादमी का मिशन न केवल अंतराल को पाटना है बल्कि दूरदर्शी नेतृत्त्व कर्ताओं को तैयार करना भी है।

जहां तक ​​प्रशिक्षण की तकनीकियों का सवाल है, सीआरपीएफ अकादमी अनिवार्य रूप से प्रशिक्षण के क्षेत्र में नई चुनौतियों और अवसरों वाले वर्तमान परिवेश में संचालित होती है। फिर भी, हमें अभी भी उन मानकों को पूरा करना होगा जो नहीं बदले हैं, जैसे प्रतिभागियों को शामिल करना, ऐसा वातावरण बनाना जो सीखने, जोखिम लेने, अभ्यास करने और समझने के लिए जाँच को प्रोत्साहित करे। हमें सीखने और मूल्यांकन के बीच संतुलन प्रदान करना जारी रखना चाहिए जहां जोखिम लेने, समस्या सुलझाने की क्षमताओं का पोषण किया जा सके।

            आज बुनियादी प्रशिक्षण के लिए शामिल होने वाले प्रशिक्षु अब प्रतिभागियों के नौकरी वर्गीकरण या कौशल प्रोफ़ाइल में समानताओं की परवाह किए बिना एक समरूप समूह नहीं हैं। प्रशिक्षण दर्शकों को अद्वितीय व्यक्तियों के समूह के रूप में मानना ​​महत्वपूर्ण होता जा रहा है जो प्रशिक्षण के मिशन और सीखने के परिणामों के बारे में अपना निर्णय लेंगे और यह पता लगाएंगे कि समूह सेटिंग्स में व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को सर्वोत्तम तरीके से कैसे पूरा किया जाए। प्रशिक्षु पूर्व सीखने के अनुभवों, विभिन्न/विस्तारित कार्यस्थलों की विविधता, प्रत्येक प्रशिक्षण के पीछे मूल्य प्रस्तावों, व्यक्तित्व विकास लक्ष्यों आदि से प्रभावित होते हैं। इसलिए, हमें संगठनात्मक प्राथमिकताओं/आवश्यकताओं के आधार पर अपनी डिलीवरी, सामग्री और उद्देश्यों को आकार देना चाहिए तथा नियमित रूप से समीक्षा करनी चाहिए।

            यह दोहराने की जरूरत नहीं है कि तेजी से उभरती प्रौद्योगिकी और सामाजिक परिवेश में, हमें अकादमी में वैज्ञानिक, एकीकृत मानव संसाधन विकास तरीकों को सुदृढ़ करना जारी रखना चाहिए जिसके परिणामस्वरूप नियोजित विकास, दक्षता, पारदर्शिता, नवीनतम तकनीक का उपयोग, संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए जवाबदेही होगी। ताकि प्रशिक्षण प्रणालियों और प्रक्रियाओं को समसामयिक रुझानों के साथ समकालिक बनाया जा सके। हमें सीआरपीएफ जैसे वर्दीधारी और अनुशासित संगठन के अभिन्न मूल मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए इन युवाओं में संगठनात्मक गौरव और आत्म-सम्मान पैदा करने का भी प्रयास करना चाहिए।

            "अकेले हम बहुत कम कर सकते हैं; साथ मिलकर हम बहुत कुछ कर सकते हैं।"
जय हिंद, जय सीआरपीएफ।